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संदर्भ

हालिया उपग्रह चित्रों से यह स्पष्ट हुआ है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर के विवादित 'स्कारबोरो शोल' के प्रवेश द्वार पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए जहाजों और फ्लोटिंग बैरियर का उपयोग शुरू कर दिया है। दक्षिण चीन सागर सामरिक और आर्थिक रूप से वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है, जहाँ चीन के बढ़ते आक्रामक कदमों ने फिलीपींस सहित पड़ोसी देशों और वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।


समाचार बिंदु

  • अवरोधक का उपयोग: रॉयटर्स द्वारा प्राप्त उपग्रह चित्रों के अनुसार, चीन ने शोल के संकीर्ण प्रवेश द्वार पर जहाजों और एक भौतिक अवरोधक को तैनात किया है।
  • फिलीपींस के साथ गतिरोध: यह कदम फिलीपींस के साथ चल रहे लंबे क्षेत्रीय विवाद के बीच उठाया गया है, जिससे क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
  • रणनीतिक नियंत्रण: चीन इस विवादित स्थल पर स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित करने और अन्य देशों के जहाजों (विशेषकर मछुआरों) के प्रवेश को रोकने के लिए 'ग्रे ज़ोन' रणनीति का उपयोग कर रहा है।


स्कारबोरो शोल: अवस्थिति एवं विवरण

  • अवस्थिति: यह दक्षिण चीन सागर के पूर्व में स्थित एक त्रिकोणीय आकार की प्रवाल भित्ति और शोल है। यह फिलीपींस के लुजोन द्वीप से लगभग 220 किमी और चीन के तट से लगभग 900 किमी दूर स्थित है।
  • प्रवेश द्वार: इस शोल का केवल एक छोटा सा संकीर्ण प्रवेश द्वार है। चीन ने इसी द्वार को अवरुद्ध किया है ताकि शोल के भीतर के शांत जल तक किसी की पहुँच हो सके।
  • विवाद की पृष्ठभूमि: फिलीपींस इसे अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का हिस्सा मानता है, जबकि चीन 'नाइन-डैश लाइन' के तहत इस पर अपना ऐतिहासिक दावा करता है।


इसका महत्व

  • मत्स्य संसाधन: यह क्षेत्र समृद्ध मत्स्य भंडार के लिए प्रसिद्ध है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सामरिक स्थिति: यह फिलीपींस के सैन्य ठिकानों के करीब है और यहाँ नियंत्रण स्थापित करने से चीन को दक्षिण चीन सागर के विशाल क्षेत्र पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।
  • प्रतीकात्मक संप्रभुता: यह क्षेत्र चीन की समुद्री विस्तारवादी नीति का एक महत्वपूर्ण परीक्षण स्थल बन गया है।


चीन के कदमों के वैश्विक प्रभाव

  • अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: यह कदम UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) के विरुद्ध देखा जा रहा है।
  • क्षेत्रीय अस्थिरता: चीन की इस घेराबंदी से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (ASEAN) में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों का सैन्य हस्तक्षेप बढ़ सकता है।
  • वैश्विक व्यापार जोखिम: दक्षिण चीन सागर से प्रतिवर्ष खरबों डॉलर का व्यापार होता है; यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य जमावड़ा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।


भारत पर प्रभाव

  • व्यापारिक सुरक्षा: भारत का लगभग 55% व्यापार दक्षिण चीन सागर के मार्गों से होकर गुजरता है। यहाँ चीन का एकाधिकार भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा है।
  • 'एकसमान' नियम आधारित व्यवस्था: भारत 'मुक्त और समावेशी इंडो-पैसिफिक' का पक्षधर है। चीन की विस्तारवादी नीति भारत के 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन के प्रतिकूल है।
  • रणनीतिक सरोकार: यदि चीन यहाँ सफल होता है, तो वह भविष्य में हिंद महासागर में भी इसी तरह की दबावपूर्ण कूटनीति का उपयोग कर सकता है।


निष्कर्ष

स्कारबोरो शोल पर चीन की नाकाबंदी केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों को दी गई खुली चुनौती है। इस संकट का समाधान केवल कूटनीतिक संवाद और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के सम्मान में निहित है। यदि इस विस्तारवाद को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक स्थायी खतरा बन सकता है।